छाया हैं पेड़ों की माया
गर्मी में सुख देती छाया
चलता चलता जो थक जाए
छाया के घर में टिक जाए
पानी पीकर प्यास बुझाए
लोरी गा गा तुरत सुलाए
[भोपाल:१५.०९.०८]
Tuesday, July 21, 2009
मम्मी पापा
सब सच कहते अच्छे हैं
ह्ह्को लगते अच्छे हैं
मेले में जो दिलबाते
खेलखिलौने अच्छे हैं
दुःख भोगें सुख हमको दें
सचमुच इतने अच्छे हैं
पढ़ने लिखने मैं जब चूकें
राह दिखाते अच्छे हैं
मम्मी धरा ,गगन पापा
सब गुन गाते अच्छे हैं
[भरूच:१४.०६.०८]
ह्ह्को लगते अच्छे हैं
मेले में जो दिलबाते
खेलखिलौने अच्छे हैं
दुःख भोगें सुख हमको दें
सचमुच इतने अच्छे हैं
पढ़ने लिखने मैं जब चूकें
राह दिखाते अच्छे हैं
मम्मी धरा ,गगन पापा
सब गुन गाते अच्छे हैं
[भरूच:१४.०६.०८]
Monday, July 20, 2009
मानू भानू
एक
म्याऊँ म्याऊँ बिल्ली बोली
मामी पापा मानू बोली
भों भों कुत्ता भौंका
सुनकर एकदम भानू चौका
दो
में में में में बकरी मिमिआई
मानू के घर नानी आई
काँव काँव जब कौवा बोला
कुहू कुहू कोयल मुंह खोला
तीन
मानू बोली पापा मम्मी
भानू बोला नाना नानी
यह सब चारों को ही भाया
हँस हँस दोनों को गले लगाया
[भरूच:१४.10.०८]
म्याऊँ म्याऊँ बिल्ली बोली
मामी पापा मानू बोली
भों भों कुत्ता भौंका
सुनकर एकदम भानू चौका
दो
में में में में बकरी मिमिआई
मानू के घर नानी आई
काँव काँव जब कौवा बोला
कुहू कुहू कोयल मुंह खोला
तीन
मानू बोली पापा मम्मी
भानू बोला नाना नानी
यह सब चारों को ही भाया
हँस हँस दोनों को गले लगाया
[भरूच:१४.10.०८]
दादी माँ
मेरी दादी
पहने खादी
कर में लकुटी
टिक टिक करती
धीरे चलती
बच्चों की शैतानी पर भी
हंस हंस कर आशीष लुटाती
खुश हो बच्चे आगे बढ़ते
मिलजुलकर शाला में पढ़ते
दादी मन्दिर को चल देती
भजन कीर्तन का सुख लेती
[भोपाल:१५.०७.०८]
khush ho गहे लकुटिया
टिक टिक करती
आगे बढ़ती
बच्चे लगे चिढ़ाने
माँ लागी खिसियाने
आई चाची भोली
खोली अपनी झोली
बच्चों को दी टॉफी
माँ को थोड़ी कोंफी
दादी चल दी मन्दिर को
बच्चे भागे शाला को
[भोपाल:१५.०७.०८.]
पहने खादी
कर में लकुटी
टिक टिक करती
धीरे चलती
बच्चों की शैतानी पर भी
हंस हंस कर आशीष लुटाती
खुश हो बच्चे आगे बढ़ते
मिलजुलकर शाला में पढ़ते
दादी मन्दिर को चल देती
भजन कीर्तन का सुख लेती
[भोपाल:१५.०७.०८]
khush ho गहे लकुटिया
टिक टिक करती
आगे बढ़ती
बच्चे लगे चिढ़ाने
माँ लागी खिसियाने
आई चाची भोली
खोली अपनी झोली
बच्चों को दी टॉफी
माँ को थोड़ी कोंफी
दादी चल दी मन्दिर को
बच्चे भागे शाला को
[भोपाल:१५.०७.०८.]
Monday, July 6, 2009
मुर्गी
रोटी का रोल
Wednesday, June 3, 2009
सपनों का संसार
सपनों का संसार निराला
बिना पंख के उड़ते
शैल शिखर पर चदते
नहीं पकड़ में आते
सरपट आते जाते
कभी अँधेरा कभी उजाला
भूत भयानक बनते
उल्टे पांवों चलते
हाथी घोड़ा भालू
पहने रुण्ड मुण्ड की माला
अनसोची सब दुनिया
ज्यों जादू की पुड़िया
भूत भविष्यत बांचें
सपने 'बच्चन 'की मधुशाला
[अलाहाबाद:ममफोर्डगंज :१३.०४.०९]
बिना पंख के उड़ते
शैल शिखर पर चदते
नहीं पकड़ में आते
सरपट आते जाते
कभी अँधेरा कभी उजाला
भूत भयानक बनते
उल्टे पांवों चलते
हाथी घोड़ा भालू
पहने रुण्ड मुण्ड की माला
अनसोची सब दुनिया
ज्यों जादू की पुड़िया
भूत भविष्यत बांचें
सपने 'बच्चन 'की मधुशाला
[अलाहाबाद:ममफोर्डगंज :१३.०४.०९]
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