जैसे ही मैं घर पहुँची
मम्मी बोली भर लो पानी
साफ सफाई घर की करलो
आने वाले नाना नानी
आए जैसे ही घर दोनों
लाये भारी भरी अटैची
दौड़ी दौड़ी मैं बस्ते से
आनन फानन लाई कैंची
देखे टॉफी खेल खिलौने
खुशियाँ भूलीं ठौर ठिकाना
होमवर्क में आई उलझन
सबसे अच्छा मिला बहाना
बटबारे ने खड़ा कर दिया
छीना झपटी और झगड़ना
चुन्नू मुन्नू किए तमाशा
रोना धोना पैर पटकना
नाना नानी ने दोनों को
अपनी अपनी गोद उठाया
आंसू पोंछे लाड़ प्यार से
चुन्नू मुन्नू को समझाया
[भोपाल:१५.१२.०८]
Tuesday, July 21, 2009
माँ
प्यारी प्यारी माँ का
मुझ पर प्यार टपकता
भनक परे रोने की
सारा प्यार उमड़ता
सब कुछ छोडे जहां तहाँ
झटपट गोदी लेती
खुश हो हो कर गाती
ढेर चुम्मियां लेती
कन्धों से चिपकाकर
खोले सरपट चोली
मीठा दूध पिलाकर
गाती मीठी रोली
[भरूच:११०३.०९]
मुझ पर प्यार टपकता
भनक परे रोने की
सारा प्यार उमड़ता
सब कुछ छोडे जहां तहाँ
झटपट गोदी लेती
खुश हो हो कर गाती
ढेर चुम्मियां लेती
कन्धों से चिपकाकर
खोले सरपट चोली
मीठा दूध पिलाकर
गाती मीठी रोली
[भरूच:११०३.०९]
हाय हाय यह वर्षा कैसी !
काले काले बदल छाये
सागर से पानी भर लाये
चंदा सूरज जेल में डाले
मुंह दिखलाने से शरमाये
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
रिमझिम रिमझिम बरसे पानी
पलभर को भी रुके ण पानी
घर से निकलो जी घबराए
आती याद सभी को नानी
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
नद नालों में पूर आ गई
गली गाँव खलिहान छा गई
ऊबे पशु पंछी नर नारी
आंधी पानी बाढ़ आगयी
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
[पंजिम:११.०८.८८]
सागर से पानी भर लाये
चंदा सूरज जेल में डाले
मुंह दिखलाने से शरमाये
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
रिमझिम रिमझिम बरसे पानी
पलभर को भी रुके ण पानी
घर से निकलो जी घबराए
आती याद सभी को नानी
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
नद नालों में पूर आ गई
गली गाँव खलिहान छा गई
ऊबे पशु पंछी नर नारी
आंधी पानी बाढ़ आगयी
हाय हाय यह वर्षा कैसी!
[पंजिम:११.०८.८८]
फूल फूल पर तितली
नंदन वन सा सजा बगीचा
हरी घास का बिछा गलीचा
फूलों ने रंग दी रंगोली
मानो खेल रहें हों होली
फूल फूल पर बैठी तितली
फूल पराग चूसतीं तितली
जैसे जैसे मैं पास गया
मन में उसके शक सुबह हुआ
हाल चल कुछ पूंछ ण पाया
फुर्र फुर्र उढ़ हाथ हिलाया
[भोपाल:०९.०७.०८]
हरी घास का बिछा गलीचा
फूलों ने रंग दी रंगोली
मानो खेल रहें हों होली
फूल फूल पर बैठी तितली
फूल पराग चूसतीं तितली
जैसे जैसे मैं पास गया
मन में उसके शक सुबह हुआ
हाल चल कुछ पूंछ ण पाया
फुर्र फुर्र उढ़ हाथ हिलाया
[भोपाल:०९.०७.०८]
चंदा तारे सजी बरात
सूरज दिन भर काम करे
सौ सौ हाथों दान करे
जब थककर चकनाचूर हो
घर जाने को मजबूर हो
चुपके से ले आए रात
चंदा तारे सजी बरात
{भोपाल:२५.०८.०८]
सौ सौ हाथों दान करे
जब थककर चकनाचूर हो
घर जाने को मजबूर हो
चुपके से ले आए रात
चंदा तारे सजी बरात
{भोपाल:२५.०८.०८]
मॉल बजाल
मम्मी पापा के छंग छंग
मॉल बजाल गया
भीतल बाहल देख सजावट
पलियों का बाजाल लगा
मोल भाव की नहीं जलूलत
छब चीजों पर भाव छपा
मन मेरा तितली -सा नाचा
मम्मी पापा के बटुआ ने
जो माँगा छो दिलबाया
तरह तरह के खिलौने
चाकलेट टॉफी लाया
जिसको देखा वही वहां से
हंसता हुआ गया
[भोपाल;:३१.०७.०८]
मॉल बजाल गया
भीतल बाहल देख सजावट
पलियों का बाजाल लगा
मोल भाव की नहीं जलूलत
छब चीजों पर भाव छपा
मन मेरा तितली -सा नाचा
मम्मी पापा के बटुआ ने
जो माँगा छो दिलबाया
तरह तरह के खिलौने
चाकलेट टॉफी लाया
जिसको देखा वही वहां से
हंसता हुआ गया
[भोपाल;:३१.०७.०८]
साइकिल
मोटर रेल जहां न जाती
साइकिल बहाँ भी आती जाती
रोटी दाल भात ना खाती
हवा के बल पर इठलाती
नहीं जरूरत चार पाँव की
सैर कराती गाँव शहर की
राम रहीमा करे सवारी
ढोती उनका बस्ता भारी
[भोपाल;.०९.०८]
साइकिल बहाँ भी आती जाती
रोटी दाल भात ना खाती
हवा के बल पर इठलाती
नहीं जरूरत चार पाँव की
सैर कराती गाँव शहर की
राम रहीमा करे सवारी
ढोती उनका बस्ता भारी
[भोपाल;.०९.०८]
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