मेरी पतंग के क्या कहने
रंग बिरंगे कपड़े पहने
महगें गहने लम्बी चोटी
हवा खिलाती उसको रोटी
फुर फुर हवा संग उड़ जाती
नीलगगन से हाथ मिलाती
लम्बी डोरी माझा तंगदा
लडें पेंच हो जाए झगड़ा
वो काटा बच्चों को भाया
लूटपाट फ़िर मज़ा उड़ाया
[भोपाल :0 ७ .02.०९ ]
Tuesday, February 10, 2009
Monday, February 9, 2009
आंखों का तारा
मेरा भैया है राजदुलारा
सबकी आंखों का तारा
मुझको रोज़ पढ़ाता
मेरा जी बहलाता
भूख लगे जब मुझको
बिस्कुट दूध पिलाता
सचमुच सब भैय्यों से न्यारा
सबकी आंखों का तारा
जब भी मेला जाता
साथ मुझे ले जाता
खेल खिलौना टॉफी
चाकलेट दिलबाता
घर आँगन का उजियारा
सबकी आखों का तारा
[भरूच: २०.०६.०८]
सबकी आंखों का तारा
मुझको रोज़ पढ़ाता
मेरा जी बहलाता
भूख लगे जब मुझको
बिस्कुट दूध पिलाता
सचमुच सब भैय्यों से न्यारा
सबकी आंखों का तारा
जब भी मेला जाता
साथ मुझे ले जाता
खेल खिलौना टॉफी
चाकलेट दिलबाता
घर आँगन का उजियारा
सबकी आखों का तारा
[भरूच: २०.०६.०८]
बुआ की भूल
माल पुआ अम्मा ने पकाए
जी भर मोटी बुआ ने खाए
अम्मा ने फिर परसी खीर
बुआ ने गप गप खाई खीर
ठंडा ठंडा पानी उडेला
मची पेट में रेलमपेला
तोंद गयी जब गेंद -सी फूल
पता चली तब बुआ को भूल
[भोपाल :१०.०८.०८]
जी भर मोटी बुआ ने खाए
अम्मा ने फिर परसी खीर
बुआ ने गप गप खाई खीर
ठंडा ठंडा पानी उडेला
मची पेट में रेलमपेला
तोंद गयी जब गेंद -सी फूल
पता चली तब बुआ को भूल
[भोपाल :१०.०८.०८]
Saturday, February 7, 2009
कोयल बच्चों में होड़
कोयल ने जब गाना गाया
बच्चों ने मिल उसे चिढ़ाया
कोयल बच्चो में होड़ लगी
सारी सीमायें तोड़ चली
कोयल ने जब जैसा गाया
बच्चों ने बैसा दुहराया
जिसने सुना उसी को भाया
मजा खूब बच्चों को आया
[ भोपाल:१६.०९ .०८ ]
बच्चों ने मिल उसे चिढ़ाया
कोयल बच्चो में होड़ लगी
सारी सीमायें तोड़ चली
कोयल ने जब जैसा गाया
बच्चों ने बैसा दुहराया
जिसने सुना उसी को भाया
मजा खूब बच्चों को आया
[ भोपाल:१६.०९ .०८ ]
Sunday, January 25, 2009
तितली
नंदन वन -सा सजा बगीचा
हरी घास का बिछा गलीचा
फूलों ने रंग दी रंगोली
मानो खेल रहे हों होली
फूल फूल पर बैठी तितली
फूल पराग चूसतीं फिरती
जैसी जैसे मैं पास गया
मन में उसके शक सुवह हुआ
हाल चाल कुछ पूँछ ना पाया
फुर्र फुर्र उढ़ हाथ हिलाया
[भोपाल:०९.07.०८]
हरी घास का बिछा गलीचा
फूलों ने रंग दी रंगोली
मानो खेल रहे हों होली
फूल फूल पर बैठी तितली
फूल पराग चूसतीं फिरती
जैसी जैसे मैं पास गया
मन में उसके शक सुवह हुआ
हाल चाल कुछ पूँछ ना पाया
फुर्र फुर्र उढ़ हाथ हिलाया
[भोपाल:०९.07.०८]
Wednesday, January 21, 2009
सुन सुन बिटिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
छिपा अँधेरा
हुआ सवेरा
तोता कौवा
जागी दुनिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
दादा दादी
पापा मम्मी
बबलू जागा
छोड़ी खटिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
चीचीं चहकी
चिड़िया बहकी
उडती तितली
अपनी बगिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
[बरोदा से भरूच रेलपथ :०३ १० ०८ ]
छिपा अँधेरा
हुआ सवेरा
तोता कौवा
जागी दुनिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
दादा दादी
पापा मम्मी
बबलू जागा
छोड़ी खटिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
चीचीं चहकी
चिड़िया बहकी
उडती तितली
अपनी बगिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
[बरोदा से भरूच रेलपथ :०३ १० ०८ ]
Monday, October 13, 2008
बचपन
बचपन बडा सुहाना
भूख लगे मां दूध पिला दे
निदियाँ आए दूध पिला दे
रोली गा दे मीठी-मीठी
कथा-कहानी छोटी-मोटी
माँ का रोज़ सुनाना
पापाजी ज्यों घर आयें
ढेरो सारी खुशिया लायें
टॉफी बिस्कुट खेल खिलौना
बाग़-बगीचा सैर काराना
चलता नहीं बहाना
[भरूच:०६.१०.०९]
जाऊँ
ool न जाऊँ
[ भरूच - नीरजा a : ०६/१०/०८]
भूख लगे मां दूध पिला दे
निदियाँ आए दूध पिला दे
रोली गा दे मीठी-मीठी
कथा-कहानी छोटी-मोटी
माँ का रोज़ सुनाना
पापाजी ज्यों घर आयें
ढेरो सारी खुशिया लायें
टॉफी बिस्कुट खेल खिलौना
बाग़-बगीचा सैर काराना
चलता नहीं बहाना
[भरूच:०६.१०.०९]
जाऊँ
ool न जाऊँ
[ भरूच - नीरजा a : ०६/१०/०८]
Subscribe to:
Posts (Atom)