Tuesday, February 10, 2009

लूटपाट फ़िर मज़ा उड़ाया

मेरी पतंग के क्या कहने
रंग बिरंगे कपड़े पहने
महगें गहने लम्बी चोटी
हवा खिलाती उसको रोटी
फुर फुर हवा संग उड़ जाती
नीलगगन से हाथ मिलाती
लम्बी डोरी माझा तंगदा
लडें पेंच हो जाए झगड़ा
वो काटा बच्चों को भाया
लूटपाट फ़िर मज़ा उड़ाया
[भोपाल :0 ७ .02.०९ ]

Monday, February 9, 2009

आंखों का तारा

मेरा भैया है राजदुलारा
सबकी आंखों का तारा
मुझको रोज़ पढ़ाता
मेरा जी बहलाता
भूख लगे जब मुझको
बिस्कुट दूध पिलाता
सचमुच सब भैय्यों से न्यारा
सबकी आंखों का तारा
जब भी मेला जाता
साथ मुझे ले जाता
खेल खिलौना टॉफी
चाकलेट दिलबाता
घर आँगन का उजियारा
सबकी आखों का तारा
[भरूच: २०.०६.०८]


बुआ की भूल

माल पुआ अम्मा ने पकाए
जी भर मोटी बुआ ने खाए

अम्मा ने फिर परसी खीर
बुआ ने गप गप खाई खीर

ठंडा ठंडा पानी उडेला
मची पेट में रेलमपेला

तोंद गयी जब गेंद -सी फूल
पता चली तब बुआ को भूल
[भोपाल :१०.०८.०८]

Saturday, February 7, 2009

कोयल बच्चों में होड़

कोयल ने जब गाना गाया
बच्चों ने मिल उसे चिढ़ाया

कोयल बच्चो में होड़ लगी
सारी सीमायें तोड़ चली

कोयल ने जब जैसा गाया
बच्चों ने बैसा दुहराया

जिसने सुना उसी को भाया
मजा खूब बच्चों को आया
[ भोपाल:१६.०९ .०८ ]

Sunday, January 25, 2009

तितली

नंदन वन -सा सजा बगीचा
हरी घास का बिछा गलीचा

फूलों ने रंग दी रंगोली
मानो खेल रहे हों होली

फूल फूल पर बैठी तितली
फूल पराग चूसतीं फिरती

जैसी जैसे मैं पास गया
मन में उसके शक सुवह हुआ

हाल चाल कुछ पूँछ ना पाया
फुर्र फुर्र उढ़ हाथ हिलाया
[भोपाल:०९.07.०८]

Wednesday, January 21, 2009

सुन सुन बिटिया

सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
छिपा अँधेरा
हुआ सवेरा
तोता कौवा
जागी दुनिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
दादा दादी
पापा मम्मी
बबलू जागा
छोड़ी खटिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
चीचीं चहकी
चिड़िया बहकी
उडती तितली
अपनी बगिया
सुन सुन बिटिया ,तोड़ न खटिया
[बरोदा से भरूच रेलपथ :०३ १० ०८ ]

Monday, October 13, 2008

बचपन

बचपन बडा सुहाना
भूख लगे मां दूध पिला दे
निदियाँ आए दूध पिला दे
रोली गा दे मीठी-मीठी
कथा-कहानी छोटी-मोटी
माँ का रोज़ सुनाना
पापाजी ज्यों घर आयें
ढेरो सारी खुशिया लायें
टॉफी बिस्कुट खेल खिलौना
बाग़-बगीचा सैर काराना
चलता नहीं बहाना
[भरूच:०६.१०.०९]
जाऊँ
ool न जाऊँ

[ भरूच - नीरजा a : ०६/१०/०८]